Sufinama

बख़ूबी हम-चू मह ताबिंद: बाशी

अमीर ख़ुसरौ

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अमीर ख़ुसरौ

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    کچھ اشعار کا اردو منظوم ترجمہ عزیز وارثی دہلوی نے کیا ہے

    बख़ूबी हम-चू मह ताबिंद: बाशी

    ब-मुल्क-ए-दिल-बरी पाइंदा बाशी

    मन-ए-दरवेश रा कुश्ती ब-ग़मज़:

    करम कर्दी इलाही ज़िंद: बाशी

    जफ़ा कम कुन कि फ़र्दा रोज़-ए-महशर

    ब-रु-ए-आशिकाँ शरमिंद: बाशी

    ज़े-क़ैद-ए-दो-जहाँ आज़ाद बाशम

    अगर तू हम-नशीन-ए-बंद: बाशी

    जहाँ-सोज़ी अगर दर ग़मज़:आई

    शकर-रेज़ी अगर दर खंद: बाशी

    ब-रिंदी-ओ-ब-शोख़ी हम-चू ख़ुसरव

    हज़ाराँ खान-ओ-मान बरकंद: बाशी

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