Sufinama

आज का विचार

"At night, I open the window

and ask the moon to come

"At night, I open the window

and ask the moon to come

प्रस्तुति

सूफ़ी

लतीफ़ शाह वारसी

 

 

अस्सलाम मज़हर-ए-ज़ात-ए-ख़ुदा

अस्सलाम शाह-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा

संत

लालदास

1540-1652

‘लाल’ जी घर कर तो हल करो सुनो हमारी सीख

दोजख वे जाएँगे घर वारी माँगे भीख

काव्य संचयन

सूफ़ी शब्दावली

बे-आरामी-ए-ज़ुल्फ़

(अलक की प्रकीर्णता) ׃वह नूर-ए-इलाही जो कण-कण में विद्यमान है और नित्य नूतन छवि दिखलाता है, इसे ‘बे-आरामी-ए-ज़ुल्फ़’ कहते हैं.

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