Sufinama

आज का विचार

Dry Wood

Green wood can be bent.

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प्रस्तुति

सूफ़ी

कैफ़ी चिरैय्याकोटी

 

 

बा-रुख़-ए-रौशन-ओ-बा-ज़ुल्फ़-ए-दराज़ आमद:ई

दिल-ए-मन ब-ऊ फ़िदायत ब-चे नाज़ आमद:ई

संत

कमाल

 

 

आदर्श आचरण -पीर पैगम्बर की बानी

पीर पैगम्बर की बानी, यारो बस्त भयो निर्बानी।।ध्रु0।।

काव्य संचयन

सूफ़ी शब्दावली

अल्लाह

इस्म-ए-ज़ात है जिस में जुमला अस्मा-ए-इलाही जमाली हों या जलाली, अफ़आ’ली हों या सिफ़ाती, शामिल हैं। ये इस्म जुमला अस्मा का जामे’ है। तमाम अस्मा पर मुक़द्दम है और तमाम अस्मा इसी के मज़ाहिर की तजल्ली हैं। इस इस्म में दो ए'तबारात हैं। एक ये कि वो हर इस्म में ज़ाहिर है। दूसरा ये कि वो जुमला अस्मा पर शामिल है। चुनांचे इस्म-ए-अल्लाह का इश्तिमाल दूसरे अस्मा पर ऐसा है जैसे हक़ीक़त-ए-वाहिदा का इश्तिमाल अपने अनवा'अ के अफ़राद पर होता है नीज़ इस का इश्तिमाल दूसरे अस्मा पर ऐसा ही है जैसे कुल मजमूई तौर पर अपने इन अज्ज़ा पर मुश्तमिल होता है जो ब-लिहाज़-ए-ज़ुहूर उस के ऐ'न हैं।

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मलफ़ूज़ात-ए-अाला हज़रत

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मसनवी मौलवी मानवी

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