Sufinama
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गुलाल साहेब

दोहा 4

गूदर धागा नाम का सूई पवन चलाय

मन मानिक मनि गन लग्यो पहिर 'गुलाल' बनाय

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गुलाल ताखी तत्त दियो प्रेम सेल्हि हिये नाय

सुमिरिनी मन महँ फिरयो आठ पहर लौ लाय

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'गुलाल' माला नाम का राखो गर में नाय

कोटि जतन छूटे नहीं रहो जोति लपटाय

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शबद 17

रेख़्ता 1

 

मंगल 2

 

होरी 3

 

अरिल्ल 38

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