उसे देखो, जो तुम्हें देखता है। उस से मुहब्बत करो, जो तुम से मुहब्बत करता है। उस की सुनो, जो तुम्हारी सुनता है। अपना हाथ उसे दो, जो थामने के लिए तैयार है।
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पहले अपने आप को नसीहत करो, फिर दूसरों को।
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कम से कम चालीस दिन के लिए अपने रब के साथ ख़ालिस हो जाओ। तुम्हारे दिल की ज़बान से मअरिफ़त और हिकमत के चश्मे जारी हो जाएँगे।
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चाहे तुम बात करो या ख़ामोश रहो, मगर हमेशा अच्छी नीयत सामने रखो। जो शख़्स किसी भी अमल से पहले अच्छी नीयत नहीं रखता, उस का अमल बातिल है।
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दुनिया की दौलत इकट्ठा करने की हवस, इंसानों को जल्दबाज़ी करने पर उकसाने वाली चीज़ है।
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