Sufinama
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जमाल

1568 - 1593

दोहा 86

अलक लगी है पलक सै पलक लगी भौंनाल

चंदन चोकी खोल दै कब के खड़े 'जमाल'

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जमला ऐसी प्रीत कर जैसी निस अर चंद

चंदे बिन निस साँवली निस बिन चंदो मंद

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दुर्जन निंदत सजन कौं तालक नांहिन लाल

छार घसे ज्यों आरसी दूनीं जोति 'जमाल'

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